कैसे मिटेगा कुपोषण का कलंक

राज्य

उमरिया 9 जुलाई – प्रदेश भर नहीं देश में कुपोषण की भयावह स्थिति को देखते हुए डब्ल्यू एच ओ, केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार सारी सुविधाएं मुहैया कराने में जुटी है लेकिन उमरिया जिले में अस्पतालों में चल रहे पोषण एवं पुनर्वास केन्द्रों में नर्सों की मनमानी के चलते स्थिति नहीं सुधर पा रही है | जिला महिला बाल विकास अधिकारी भी अस्पतालों की स्थिति देख दुखी हैं वहीँ जिले के कलेक्टर इस मामले पर बोलने को तैयार नहीं हैं |

उमरिया जिले में कुपोषण की स्थिति भयावह है, जिसको देखते हुए जिले के कलेक्टर गर्मी के मौसम में अपने चेंबर की एसी जिला अस्पताल के पोषण एवं पुनर्वास केंद्र को दान कर खूब नाम कमा लिए लेकिन जिले के अस्पतालों की स्थिति देखने का समय नहीं रहा | जिले के माह मई के कुपोषण के आंकड़ों को देखा जाय तो शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों की संख्या जिले में 55 हजार 251 है जिसमें कम वजन के बच्चों की संख्या 10 हजार 877 है और अति कम वजन के बच्चों की संख्या 1 हजार 889 है | जिले में कुपोषण की स्थिति सुधारने के लियी आने वाले बजट की कमी नही है | कुपोषण मिटाने के लिए डब्ल्यू एच ओ, केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार सभी की तरफ से पर्याप्त बजट आता है उसके बाद भी जिले के कलेक्टर आम जन से अपील किये कि कुपोषण मिटाने में मदद कर सहयोग करें जिले के नागरिक भी सहयोग किये वहीँ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने – अपने केन्द्रों से बच्चों को चिन्हित कर एन आर सी ( न्यूट्रेशन रिहैविटेशन सेंटर ) अर्थात पोषण एवं पुनर्वास केंद्र तक लाने में पीछे नहीं हैं, लगातार बच्चों को एन आर सी में लाकर भर्ती करवा रही हैं लेकिन अस्पताल की मनमानी का रवैया यह है कि बच्चों की माताओं को भर पेट भोजन नहीं मिल रहा है साथ ही बच्चों को भी ठीक ढंग से पोषण आहार नहीं मिल रहा है, इतना ही नहीं जो बच्चे बीमार हो रहे हैं उनको ईलाज भी मुहैया नहीं हो रहा है | वहां अपने बच्चों को भर्ती करने लाई माताएं ज्ञानवती सिंह राजेश्वरी सिंह, सविता कोल, बताईं कि हमारी बच्ची को 3 दिन से दस्त और उल्टी हो रही है कोई देखने वाला नहीं है, ठीक से भर पेट खाना भी नहीं मिल रहा है, वहां मौजूद डियूटी नर्स ताना भी मारती है कि नमक रोटी खाने वाली यहाँ आकर चावल – दाल खा रही है और सो रही है उसके बाद बात करती है इतना ही नहीं खाना लेने जाने के लिए भी बच्ची को गोद में लेकर सीढ़ी से नीचे जाना पड़ता है वहीँ बाहर जाने पर पुलिस की धमकी भी दी जाती है | यदि देखा जाय तो नर्सों की दबंगई चरम पर है और सी एम एच ओ देखने की फुरसत नहीं है |

जिला अस्पताल के एन आर सी में माताओं और बच्चों के साथ हो रहे इस व्यवहार की खबर लगते ही जिला महिला बाल विकास अधिकारी अस्पताल पंहुची तो उनके सामने जमीन पर रख कर खाना खाते माताएं मिली और पीने का गंदा पानी भी मिला साथ ही एन आर सी में गन्दगी और मक्खियाँ भी नजर आईं | जिला महिला बाल विकास अधिकारी शांती बेले बताई कि यहाँ कि अनहाईजेनिक स्थिति तो मैं देखी वो ठीक नहीं है जैसा कि यहाँ 20 बिस्तर रखा गया है तो उतनी जगह नहीं है उसकी वजह से भी संकरा हो गया है और खाना भी जो माताओं को दिया गया है, बच्चों को जो खाना दिया गया है उसको मैंने नहीं देखा, माताओं को जो खाना दिया गया है और नीचे बैठ कर खा रही हैं वो तो अनहाईजेनिक है ही इसमें कोई दो मत नहीं है, जब उनसे पूंछा गया कि ऐसे में कैसे कुपोषण मिटेगा तो कहीं कि ये बात तो सही है अच्छा खाना, अच्छा पानी और हाईजिन ये तीन चीजें ही हैं हमारा कुपोषण, और पानी भी व्यवस्था नहीं है यहाँ, वहीँ जिले के कलेक्टर की बडाई करते हुए कहीं कि कलेक्टर साहब बहुत संवेदनशील हैं और उन्होंने अपने तरफ से बहुत प्रयास किया है कि बच्चों को अच्छे से अच्छा सुविधा मिले उन होने किया लेकिन जब वास्तविकता में जब हम यहाँ देखते हैं तो यहाँ हम वो व्यवस्था नहीं पा रहे हैं |

इस मामले में जब जिले के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी से बात करने गए तो 4 घंटे इंतज़ार करने के बाद भी वो कुछ नहीं बोले और कन्नी काट कर वीडियो कांफ्रेंसिंग में चले गए, सुर्खियाँ बटोरना तो बहुत आसान है लेकिन अस्पताल की निरंकुशता पर अंकुश लगाना और सी एम एच ओ को इसके लिए निर्देशित कर कुपोषण के कलंक को मिटाने का जमीनी स्तर पर प्रयास करना कठिन लगता है | ऐसे में साफ़ जाहिर होता है कि अस्पताल प्रबंधन पर कलेक्टर का वश नहीं है |

 

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