चंदिया नगर पंचायत में हुआ 5 करोण का घोटाला – सुरेन्द्र त्रिपाठी

राज्य

उमरिया 20 जुलाई – जिले के नगर पंचायत चंदिया में प्रभारी सी एम ओ, उपयंत्री और परिषद के जन प्रतिनिधि मिल कर 5 करोड़ की राशि का किये बंदरबांट, नगर परिषद नियमों के जानकार बताये नियम विरुद्ध हुआ बड़ा घोटाला, चंदिया के नागरिक भी हैं हैरान, ततकालीन सी एम ओ अपने को बताये निर्दोष, प्रभारी इंजीनियर मिडिया के सामने आने की जगह भागता रहा, वर्त्तमान सी एम ओ कहे कि बिना जांच के हम किसी को दोषी नहीं मानते वहीँ एस डी एम बांधवगढ़ कहे कि जांच का निर्देश मेरे को मिला है जांच के बाद सामने आयेगा मामला |

जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई है तब से उमरिया जिले में जिस अधिकारी को मौक़ा मिल जाता है वह घोटाला करने में नहीं चूकता, ऐसा ही मामला चंदिया नगर पंचायत का सामने आया है | यहाँ थोड़ा बहुत नहीं 3 माह में 5 करोड़ का घोटाला हो गया | यहाँ आपको बता दें पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चंदिया नगर को स्मार्ट सिटी घोषित करके गए थे जिसके चलते नगर के लोग बहुत खुश हुए और मुख्या मंत्री को बधाई भी दे दिए, अपने से अपने घरों और दुकानों को तोड़ कर नगर को  व्यवस्थित बनाने के लिए सहयोग किये कुछ लोगों पर जिला प्रशासन भी सख्ती किया और उनके निवास पर बुलडोजर चलवा दिया फिर भी लोग खुश रहे कि नगर विकसित हो जाएगा और हमारे आय का जरिया बन जाएगा लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी उस समय फिर गया जब अधिकारी इस योजना को अपनी कमाई का जरिया मान लिए और नगर की स्थिति जस की तस रह गई आज भी लोग परेशान हैं, नगर के व्यापारी भर नहीं श्रद्धालु भी परेशान हैं | इस मामले में नगर के श्रद्धालु राघवेन्द्र मिश्रा, व्यापारी अशोक कुमार अग्रवाल, व्यापारी पंकज अग्रवाल, चंदिया के नगरी राकेश शर्मा और वार्ड नंबर 11 के पार्षद पति संजय कुशवाहा बताये कि नगर की प्रसिद्ध मंदिर को भी स्मार्ट सिटी योजना में लिया गया था, कथली नदी के किनारे वाल बनाना और रोड बनाना कार्य में शामिल था लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ बल्कि जो रोड थी उसको भी खोद दिया गया और नदी किनारे थोड़ा सा कंक्रीट कर राड खडा कर दिया गया जिससे लोग गिरें तो मौत निश्चित है | वहीं नगर में धूल का अम्बार भरा है लोगों का जीना दूभर है, व्यापार चौपट हो गया है आज कोई भी नगर के भीतर घुसना नही चाहता है, इतना ही नहीं नगर में स्वच्छता मिशन के तहत भी कुछ नहीं किया गया लोगों को पेशाब के लिए खुले में कालेज की बाउन्ड्री के बगल में जाना पड़ता है, वहीँ पार्षदों को किसी प्रकार की जानकारी ही नहीं दी जाती है, नागरिक यदि सूचना के अधिकार के तहत कोई जानकारी माँगते हैं तो वह भी नहीं मिलती है, अफसरशाही जोरों पर है, लोगों के घरों में धूल का यह हाल है कि एक कपड़ा दिन भर नहीं पहन सकते हैं वहीँ सब कुछ अधिकारी, नेता और अध्यक्ष मिल बाँट लेते हैं |

अब अगर घोटाले की तरफ चलें तो नगर पालिका नियमों के जानकार उमरिया नगर पालिका के पूर्व पार्षद ज्ञानेंद्र सिंह गहरवार बताये कि चंदिया नगर परिषद् में लगभग 5 करोड़ का घोटाला हुआ हाउ यह घोटाला चनाडिया नगर परिषद के प्रभारी सी एम ओ और जन प्रतिनिधियों द्वारा मिल कर किया गया है, विनोद चतुर्वेदी 20 मार्च को प्रभार लिए और 20 जून तक पद पर बने रहे और इसी 90 दिन में 5 करोड़ का चेक काट दिए जिसमें 1 व्यक्ति के नाम से 56 – 56 चेक काटे गए हैं वह भी दो दिन में, वहां न किसी प्रकार का टेंडर किया गया, जबकि नगर पालिका की प्रक्रिया प्रस्ताव से शुरू होती है, नगर परिषद् में जितने भी काम कराये गए हैं उसमें किसी भी काम के प्रस्ताव पारित नहीं किये गये हैं, जब प्रस्ताव ही पारित नहीं हुए तो काम कहाँ से होंगे, यदि प्रस्ताव पारित होते हैं तो प्रस्ताव पारित होने से लेकर चेक भुगतान होने तक किसी भी काम को होने में लगभग 9 से 10 माह लगते हैं यहाँ कुल प्रक्रिया 90 दिन में पूरी हो गई सी एम ओ भी प्रभारी और अध्यक्ष भी प्रभारी थे दोनों मिल कर मध्य प्रदेश शासन के और लोगों के करोड़ों रुपये जो टैक्स के पैसे थे उनको अपने व्यक्तिगत उपयोग में लाया गया और कुल 3 से 4 फार्मों के चेक काट दिए गए वहीँ कलेक्टर उमरिया के द्वारा विद्युतीकरण का कार्य करने के लिए लोक निर्माण विभाग के विद्युत् एवं यांत्रिकी के उपयंत्री श्रीवास्तव जी को वहां अटैच किया गया था, उन्होंने सिविल के भुगतान अपने हस्ताक्षर से करवाए, सबसे बड़ी बात तो यह है कि जो व्यक्ति सिविल की योग्यता ही नहीं रखता वह सिविल का भुगतान कैसे कर सकता है, लेकिन यहाँ करवा दिया गया |

वहीँ नगर के भीतर बने भरोसा तालाब के नाम पर भी लंबा बजट निकाल कर प्रभारी सी एम ओ और परिषद् के अध्यक्ष उपयंत्री डकार गए इस मामले में नगर के नागरिक अशोक अग्रवाल बताये कि यह भरोसा तालाब काफी पुराना है और नगर का पानी इसके सामने बनी तलैया में आता था और भर जाता था लेकिन नगर परिषद् द्वारा 10 – 12 फुट गड्ढा करवा दिया गया था और दूसरे तरफ से पानी निकालने की योजना बनाये थे लेकिन  बिना किसी योजना के काम किये जबकि उधर 15 फुट ऊंची चट्टान होने के कारण पानी नहीं निकल सकता था जिसके कारण फिर से गड्ढे को भरवा दिया गया और ह्युम पाईप भी मंगवा लिया गया जो पड़े हैं जिसके चलते एक किसान के खेत में पानी भर गया और पूरी खेती चौपट हो गई अब वो भीख मांग कर अपना पेट भरेगा इसमें हल्ला मचा है कि प्रभारी सी एम ओ चौबे जी के द्वारा 3 करोड़ 46 लाख रुपये बिना किसी योजना के निकाला गया है यहाँ पूरा भ्रष्टाचार मचा हुआ है कोई किसी जनता को बताने के लिए तैयार नहीं है, पूरी दादागीरी चल रही है पूरे नगर में नालियां खोद दी गई हैं यहाँ कोई इंजीनियर नहीं है कोई व्यवस्था नहीं है जिसका जो मन पड़ता है अधिकारी करते हैं, कचरे का अम्बार लगा है नागरिक परेशान हैं |

इस बारे में भी नगर पालिका नियमों के जानकार ज्ञानेंद्र सिंह बताये कि भरोसा तालाब में 9 लाख कुछ रुपये का ह्युम पाईप खरीदा गया है, एक तालाब में पानी अन्दर लाने के लिए और निकालने के लिए दो नो तरफ पाईप लगता है एक तालाब में ज्यादा से ज्यादा 4 पाईप लगेंगे एक तालाब में 9 लाख 70 हजार रुपये का पाईप के लिए भुगतान किया गया है यह तो विशुद्ध रूप से घोटाला है, 9 लाख का पाइप तो पूरे चंदिया नगर में बिछा देंगे तो भी पाईप बच जायेंगे, वहीँ मढ़लिन माता मंदिर में इन होने कुछ भी काम नहीं करवाया, मंदिर का कुल एरिया ही 14 – 15 सौ वर्ग फुट का है वहां मंदिर भी बना है उसमें समतलीकरण के नाम पर तकरीबन 79 हजार रुपये का  भुगतान जेसीबी मशीन का कर दिए जबकि जेसीबी मशीन का रेट लगभग 7 – 8 सौ रूपये प्रति घंटा है जब 79 हजार रुपये का भुगतान कर रहे हैं तो लगभग 100 घंटे काम हुआ है जबकि 100 घंटे में पूरा नगर खोदा जा सकता है या एक नया तालाब बन सकता है |

इस मामले में जब वर्तमान सी एम ओ दिन एश तिवारी से बात किया गया तो वो नाजान बनाते हुए कहे कि चर्चा समाचार पत्रों और आपके माध्यम से हमको भी प्राप्त हुई है लेकिन हम घोटाले शब्द का उपयोग नहीं कर सकते हैं यह जांच का विषय है किसने भुगतान किया है किसके कार्यकाल का विषय है, कौन से अधिकारी पदाधिकारी पदस्थ थे, जांच होने के उपरांत ही इस पर निष्कर्ष निकाला जा सकेगा, और जान च के बाद शासन कार्यवाई करेगी |

इस मामले में जब तत्कालीन सी एम ओ विनोद चतुर्वेदी से बात किया गया तो वो अपने आप को निर्दोष बताते हुए कहे कि मैं कोई भी काम नियम विरुद्ध नहीं किया हूँ जबकि ये सब काम इंजीनियर के द्वारा किये जाते हैं वो टेक्नीकल व्यक्ति होता है जब उसके द्वारा कोई भी नस्ती प्रस्तुत की जाती है तभी कोई कार्यवाई सी एम ओ के द्वारा की जाती है और ये जो 3 करोड़ 46 लाख बताया जा रहा है उसमें सभी खर्च नगर परिषद् से हुए होंगे वेतन, बिजली बिल, अन्य सफाई सामग्री का कार्य हुआ होगा सिविल से उतना खर्च हुआ ही नहीं | कितने भोले हैं ये प्रभारी सी एम ओ जो कुछ जानते ही नहीं है बस बजट कैसे निकलना है निकाल लिए |

वहीँ जब इस मामले में नगर पंचायत चंदिया में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ लोक निर्माण विभाग के विद्युत् एवं यांत्रिकी के उपयंत्री ए के श्रीवास्तव से जानकारी चाही गई तो पहले तो जाकर एक घर में छिप गए जब वहां पता करते हुए जाया गया तो वहां से बात करने की जगह दौड़ लगा कर भागे जिससे साफ़ जाहिर होता है कि उपयंत्री सी एम ओ और अध्यक्ष से मिल कर फर्जी बिल का भुगतान करवाए हैं |

इस मामले में जब एस डी एम बांधवगढ़ एल के पाण्डेय से बात किया गया तो उनका कहना है कि हमको सर का निर्देश हुआ है तो मैं जाउंगा, बीच में मैं जाना चाहता था तो  चंदिया नगर पंचायत में कोई थे ही नहीं नए थे न कोई प्रभारी थे ये लोग भोपाल गये थे अब आ गये हैं तो एकाध दिन में जाउंगा और जो भी जानकारी होगी उसकी जांच करके प्रतिवेदन कलेक्टर साहब को सौंप दूंगा |

गौरतलब है कि जिले को अधिकारी चारागाह बनाये हुए हैं जिसको मन होता है आम जनता के नाम और विकास के बजट को अपने ढंग से बिना किसी नियम और बिना किसी संकोच के डकारने में लगे हैं, हालाँकि जिले में यह काम सरकार बदलने के साथ तेजी से होने लगा है क्योंकि सरकार को तबादलों से फुरसत नहीं है और अपने वायदों को भूल कर जनता से कोई लेना देना नहीं है, हालाँकि इस सरकार में यह भी खुले आम देखने को मिल रहा है कि फरियादी ही पिस रहा है और अधिकारी तो ईमानदारी का लेबल लगाये बैठे हैं, अब कब तक इसकी जांच होगी या यह मामला भी ईमानदारी में निपट जाएगा |

 

 

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