मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलते ही हुई 3 बाघों की मौत – सुरेन्द्र त्रिपाठी

राज्य

उमरिया 31 जुलाई – जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में फिर हुई बाघिन और उसके शावक की मौत | पार्क प्रबंधन मामले को रखा था दबा कर, काफी मशक्कत के बाद सामने आये अधिकारी | 5 दिन पहले हुई थी बाघिन की मौत और 3 दिन पहले हुई शावक की मौत, मामला संदिग्ध, पार्क प्रबंधन बता रहा है आपसी लड़ाई के कारण मौत |वहीँ जिले के पाली उप वन मंडल अंतर्गत आने वाले रेंज घुनघुटी के मड़वा गाँव के समीप कक्ष क्रमांक आर ऍफ़ 214 में भी एक बाघ शावक की मौत कल हो गई रेंजर के पी त्रिपाठी बताये कि कल हम लोगों को बाघ के पड़े होने की सूचना मिली थी तब तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और रात भर हमारा पूरा अमला मौके पर ही रहा, डॉग स्क्वायड को सूचना दिया गया आज वो भी आया है जांच किया जा रहा है। प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिलते ही लगातार हो रही है बाघों की मौत। रेंजर का कहना है कि आपसी लड़ाई में हुई है बाघ की मौत। हालांकि देखा जाय तो बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के कुप्रबंधन के चलते और बाघों को जगह की कमी होने के चलते बाघ बाहर जा रहे हैं और मारे जा रहे हैं |

विश्व के मान चित्र पर अपना अलग स्थान रखने वाला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व कई सालों से बाघों की मौत के मामले में सुर्ख़ियों में रहा है, जब यहाँ संचालक के पद पर मृदुल पाठक पदस्थ थे तब तो लगातार बाघों की मौत होती रहती थी लेकिन उनके सेवा निवृत्त होने के बाद भी 2 बाघों की मौत होकर लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया | एक तरफ तो देश के प्रधान मंत्री अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर बड़े – बड़े कार्यक्रम में रहे और वहीँ मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिया जा रहा था, दूसरी तरफ प्रदेश के मुखिया लोगों को बधाई दे रहे थे वहीँ बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में टी 62 और उसके नर शावक की मौत ने सबको चौंका दिया | यदि सूत्रों की माने तो 2 बाघों की मौत एक साथ होना संदिग्ध है | पार्क प्रबंधन इस मामले को दबा कर रखा था किसी का फोन तक उठाने की जहमत कोई नही किया और न ही किसी तरह की कोई जानकारी दिया गया जबकि बाघिन की मौत 5 दिन पहले हो चुकी थी और उसके शावक की मौत 3 दिन पहले हुई है फिर भी जब मामले का पता चला तो प्रभारी पार्क संचालक ए के जोशी ने किसी का फोन तक नहीं उठाया वहीँ पार्क के एस डी ओ और प्रभारी उप संचालक ए के शुक्ला भी काफी मशक्कत के बाद फोन उठाये और मिलने से मना कर दिए, पहले तो जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर ताला में सबको बुलाया गया बाद में वहां पहुँचने पर कह दिए कि मैं उमरिया आ गया हूँ और अभी व्यस्त हूँ किसी तरह सभी लोग वापस उमरिया आये तब बताने को तैयार हुए और बताये कि एक नर बाघ टी 33 है उसके द्वारा मादा बाघ टी 62 अपने 2 शावकों के साथ किल की थी और उसी समय 33 आ गया और बच्चों को बचाने के लिए टाइगर से भीड़ गई है और उसने उसको मार दिया होगा दूसरे दिन नर शावक को भी मार दिया उसका पोस्ट मार्टम किया गया उसकी रिपोर्ट में आ जाएगा, और उसकी फीमेल मिल गई है जो 3 दिन से नहीं मिल रही थी ये 28 तारीख को कल्लवाह रेंजर बताये कि एक शावक उत्तर महेनवाह बीट में कम्पार्टमेंट नंबर 239 में मिला है, उसी सर्चिंग के दौरान उसकी माँ टी 62 का शव मिला है और अभी टी 33 को तलाश रहे हैं उसके पग मार्क मिले हैं अभी नहीं मिला है और ये अक्सर बरसात के मौसम में होता रहता है वहीँ बाघिन का शव 26 की रात का होने का अनुमान लगाये, वहीँ बताये कि पहले मादा को मार दिया है उसके दूसरे दिन उसके बच्चे को मारा है, उनके बताने के ढंग से ऐसा लगा कि जैसे टी 33 बाघ की खानदानी दुश्मनी रही और खोज कर दूसरे दिन उसके वंशज को मारा है जब उनसे पूंछा गया कि टी 33 को भी चोट  आई होगी तो कहे कि आपका अनुमान सही है अभी तलाश कर रहे हैं वहीँ जब पार्क प्रबंधन की लापरवाही के बारे में पूंछा गया तो कहे कि अभी तो जांच चलेगा उसमें जो भी कमिया खामिया मिलेगी उस पर कार्यवाई होगी अभी तो ताजी घटना है टाइगर की जान का सवाल है बांधवगढ़ की प्रतिष्ठा का सवाल है हम लोग उसी के लिये लगे हैं और कहीं ऐसी लापरवाही पाई गई तो जरूर कार्यवाई होगी |

गौरतलब है कि उमरिया जिले में ऐसी घटनाओं को देख कर लगता है कि बाघों की गिनती भी तो कहीं फर्जी नहीं है जहाँ आये दिन बाघों की मौत हो रही है वहां बाघों के कुनबे में लगातार वृद्धि पार्क प्रबंधन द्वारा बताना किसी के गले नहीं उतर रहा है | सबसे ख़ास बात तो यह है कि मानसून गश्ती कहीं नहीं होती यदि गश्ती होती तो बाघ शावक और बाघिन की मौत का पता तत्काल चल जाता, ऐसे में आवश्यकता है उच्च स्तरीय जांच की ताकि सच्चाई सामने आ सके | वन्य जीव प्रेमियों में लगातार 3 – 3 बाघों की मौत की खबर ने निराशा भर दिया है ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब प्रदेश से टाइगर स्टेट का छीन जाएगा |

 

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