विश्व स्तनपान दिवस पर हुई कार्यशाला – सुरेन्द्र त्रिपाठी

राज्य

एक सोच बदल सकती है नवजात बच्चे का भविष्य-शांति बेले

मीडिया के सहयोग बिना सब अधूरा-सदाफल

उमरिया 7 अगस्त – माता पिता या परिवार के अलावा गर्भावस्था मे रहने वाली माताओं की एक सोच नवजात बच्चे का भविष्य बदल सकती है, उन्हें कुपोषण जैसी गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है, उक्त उदगार आज मंगल भवन मे आयोजित विश्व स्तनपान दिवस की मीडिया कार्यशाला मे मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्रीमती शांति बेले ने व्यक्त किये। उन्होने कहा कि गर्भावस्था के दौरान माताओं की देखभाल सही तरीके से नही हो पाती है, जिसके कारण प्रसव के वक्त जच्चा और बच्चा दोनो खतरे मे पड़ जाते हैं और इसी का नतीजा है कि कमियों के कारण बच्चे की मौत हो जाती है। वही महिलाएं मोटे अनाज का सेवन नही करती जिससे बीमारियां जन्म लेती हैं, आज के परिवेश मे महिला बाल विकास मंत्रालय ने मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए ढेरों योजनाओं के माध्यम से लोगो को जागरूक करना या नुक्कड़ नाटकों के साथ गांव गांव जाकर लोगो को समझाया जा रहा है। मक्का, ज्वार महुआ आदि मोटे अनाज का सेवन करने से किशोरी बालिकाए और गर्भवती महिला विभिन्न बिमारियों से बच सकती हैं। डीपीओ ने लचर जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि हमारे विभाग की हर कोशिश वहां फेल हो जाती है जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है। पोषण पुर्नवास केन्द्र की हालत बेहद चिंताजनक है यहां भर्ती होने वाला कुपोषित बच्चा लगातार 14 दिन भर्ती रहने के बाद भी उसकी हालत नही सुधर पाती है, जिले के सी एम एच ओ को शासन की योजनाओं से कोई लेना देना नही है, उन्होंने कहा कि हमारी कार्यकर्ताएं लगातार प्रयास कर रही हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग जरा भी सहयोग नही कर रहा है। एन आर सी की यह स्थिति है कि वहां भर पेट भोजन नहीं मिल पाता है, एक सेक्टर में 43 बच्चों की मौत हो चुकी है जो कि बेहद चिंताजनक है, में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से इत्तेफाक नही रखती हूं, लगातार हम जिले के अधिकारियों से बात करते हैं लेकिन उनकी तरफ से कोई सहयोग नही मिल रहा है ऐसे में कुपोषण से मुक्ति कैसे मिलेगी।

स्तनपान कराने के फायदे

डीपीओ ने बताया कि प्रसव के बाद मां अपने शिशु को अगर स्तनपान कराती है तो वह अपने और अपने बच्चे को अनेको बीमारियों से भी बचा सकती है। स्तनपान भूख और कुपोषण की रोकथाम करता है, स्तनपान मानसिक एवं संज्ञानात्मक विकास मे योगदान देता है तथा स्कूल जाने की तैयारी के लिए नींव डालता है। स्तनपान से हर बच्चे को एक बेहतर जीवन की शुरूआत मिलती है। पूरक आहार से बच्चो के जीवन संभावना 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जन्म से 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले एचआईवी प्रभावित बच्चे की जीवन छमता बढ़ जाती है।  ऐसी कई सारे उपाये है जिन्हें हम करके अपने और अपने बच्चे का भविष्य संवार सकते है। कार्यक्रम मे पत्रकारों के अलावा करकेली परियोजना अधिकारी सुनेन्द्र सदाफल, उमरिया परियोजना अधिकारी श्री पाण्डेय, जिले की समस्त सुपरवाइजर व कर्मचारी गण मौजूद रहे।

गौरतलब है कि जिले के सी एम एच ओ को जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी ही नही है, उनको तो बस बजट ही दिखता है कि कैसे उसको डकार सकें, यदि ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था देखा जाय तो बद से बदतर है। ग्राम बल्लहौंण को ही देखा जाय तो वहां पदस्थ ए एन एम कभी जाती ही नही है जबकि वहां विभाग द्वारा डिलीवरी पॉइंट बनाया गया है, इंदवार क्षेत्र डॉक्टर विहीन है, ऐसे में एक विभाग वह भी बिना प्रशिक्षण के अकेले कैसे सारी योजनाओं को अंजाम दे सकता है। सबसे खास बात तो यह है 8 अगस्त को कृमिनाशक गोली बच्चों को खिलाना है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा शाम तक किसी कार्यकर्ता को न ही प्रशिक्षण दिया गया और न ही गोलियां दी गई, ऐसे में तो प्रदेश सरकार को सी एम एच ओ के बारे में संज्ञान लेना चाहिए जो फर्जी आंकड़े भेज कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।

 

 

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