चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने भेजी चांद के सतह की तस्वीर, सतह पर नज़र आये गड्ढे।

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विशेष बातें-

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर कर रहा है शानदार काम, भेजी हाई रेजॉलूशन तस्वीरें.

इसरो ने जारी की चांद की तस्वीरें

14 दिन बाद चांद पर आज से दिन, सौर पैनलों से लैंडर विक्रम शुरू कर सकता है काम

7 सितंबर को विक्रम की चांद के सतह पर हुई थी हार्ड लैंडिंग

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अपने मकसद पर लगातार जुटा है, ऑर्बिटर द्वारा हाई रिजोल्यूशन कैमरे से चांद के सतह की खींची गई तस्वीरें इसरो ने जारी की है। ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई तस्वीर को देखिए इसमें चंद्रमा के सतह पर बड़े और छोटे गड्ढे नजर आ रहे हैं।

इसरो के मुताबिक, आर्बिटर में मौजूद आठ पेलोड हैं जो चांद की सतह पर मौजूद तत्वों में आवेशित कणों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है, उन्हीं पेलोड क्लास द्वारा की गई जांच से ये बात सामने आई है कि चांद की मिट्टी में मौजूद कण सूरज की तेज रोशनी पड़ने पर वहां मौजूद एक्स किरणों की वजह से चांद की सतह चमक उठी।

14 दिनों के बाद एक बार फिर चांद पर आज से दिन, सौर पैनलों की वजह से एक बार फिर विक्रम हो सकता है सक्रिय।

चांद पर धरती के 14 दिनों की रात और 14 दिनों का दिन होता है, लिहाजा चांद की रात में अंधेरी सतह पर निष्क्रिय पड़े चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से फिर एक बार उम्मीद जगी है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि विक्रम के सौर पैनलों पर सूर्य की रोशनी पड़ने से विक्रम फिर काम शुरू कर सकता है। आपको बतादें कि चांद पर शनिवार 5 अक्टूबर से फिर दिन की शुरुआत हो रही है 14 14 दिनों की होगी, लिहाजा विक्रम से संबंधित कोई अच्छी खबर आने की संभावना बढ़ गई है। जबकि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का कहना है कि चांद के आकाश में चक्कर लगा रहा चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सिलिकॉन, टाइटेनियम, सोडियम, एल्युमीनियम, कैल्शियम और लोहे जैसे महत्वपूर्ण खनिज तत्वों की खोज करेगा।

 

इसरो की माने तो, चंद्रमा के आकाश में चक्कर लगा रहा ऑर्बिटर का पेलोड अपने निर्धारित कार्य को शानदार तरीके से कर रहा है। दूसरी ओर, विक्रम को खोजने और उससे संपर्क स्थापित करने की कोशिशों में जुटी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि अब तक विक्रम से कोई आंकड़ा नहीं मिला है। जबकि खगोलविद् स्कॉट टायली ने ट्वीट पर लिखा है कि विक्रम से संपर्क की पूरी उम्मीद है। टायली का कहना है कि विक्रम को खोजने में कामयाबी आवश्य मिलेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि चंद्रमा पर दिन होने के साथ ही विक्रम से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें और तेज होंगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान “इसरो” के एक वैज्ञानिक ने कहा है कि अब विक्रम से संपर्क स्थापित करना बेहद मुश्किल होगा, लेकिन कोशिश जारी रखने में कोई हर्ज नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “सिर्फ ठंड ही नहीं, बल्कि झटके से हुआ असर भी चिंता की बात है। हार्ड लैंडिंग के चलते विक्रम तेज गति से चांद की सतह पर गिरा होगा। इस झटके के चलते विक्रम के भीतर मौजूद उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है।” चांद की परिक्रमा लगा रहा नासा के लुनर रिकॉनिएसेंस ऑर्बिटर ने जो तस्वीरें भेजी थीं, चांद पर रात होने के चलते उससे तस्वीरें साफ नहीं आ पाई थीं।

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