कोरोना आपदा नही अवसर, सैकड़ों जान खतरे में, जिला अस्पताल की लापरवाही

हेल्थ

सुरेन्द्र त्रिपाठी

उमरिया 28 अगस्त – जिले में इन दिनों कोरोना के मरीजों की दिनों दिन संख्या बढ़ रही है जिला अस्पताल में भी हड़कंप तब मच गया जब एक नर्स एसएनसीयू से, और दो नर्स डिलीवरी वार्ड से व एक वार्ड बॉय के पॉजिटिव आने से उमरिया जिला अस्पताल में सनसनी मच गई, सैकड़ों जच्चा बच्चा की जान पर मंडरा रहा खतरा, 20 अगस्त को चंदिया निवासी एक दंपति के नवजात की भी हो चुकी है मौत, इतना ही नहीं पाली उप स्वास्थ्य केंद्र में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज ने अस्पताल की सारी पोल खोल कर रख दिया। कोरोना के नाम पर मची है अच्छी खासी लूट, भोजन भी ऐसा दिया जाता है कि लोगों को घर से मंगा कर खाना पड़ता है। सुबह नाश्ते के नाम पर एक केला और एक सेव दिया जाता है, वहीं दोपहर में भोजन के नाम पर बेस्वाद खाना दिया जली भुंजी सब्जी बेस्वाद दाल नाम भर को सलाद और एक टुकड़ा अचार दिया जाता है, रोटियों के बारे में जरूर इतना बताया गया कि जितना मांगे उतना मिल जाता है, वह भी अधपकी सी होती है।

सुबह का नाश्ता 2 लोगों का
दो लोगों का खाना


उमरिया जिले में अब तक कोरोना के पॉजिटिव केस की संख्या 116 है जिसमें दो की मौत हो चुकी है और एक्टिव केस 42 हैं जिसमें 72 लोग रिकवर होकर अपने घर जा चुके हैं लेकिन जब उमरिया अस्पताल की नर्सें और वार्ड बॉय कोरोना पॉज़िटिव आने लगे तो अस्पताल में अफरा तफरी की स्थिति बन गई वही पाली उप स्वास्थ्य केंद्र में एक मरीज जो कोरोना पॉजिटिव था वह अपने कैमरे के सामने स्वास्थ्य विभाग की पूरी पोल खोल कर रख दिया, कोरोना पॉजिटिव मरीज ने खुद अपना वीडियो जारी कर बताया कि अस्पताल में न तो कोई दवा दी जा रही है और न ही खाने – पीने की ठीक से व्यवस्था है, वहीं यह भी कहा कि मेरे को शरीर मे दर्द हो रहा है लेकिन कोई सुनने वाला नही है, ऐसे में मेरे को अगर कुछ होता है सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

वहीं जब जिले के कलेक्टर पाली अस्पताल पहुंचे तो उनको बुला कर सारी स्थिति से अवगत करवाया तब कलेक्टर साहब पाली बी एम ओ डॉक्टर व्ही के जैन पर नाराज होते हुए व्यवस्था सुधारने को कहे।
इस मामले में जब उमरिया सीएमएचओ डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव से बात की गई कि डिलीवरी वार्ड की स्टाफ नर्स कोरोना पॉजिटिव आ गई है और लगातार डियुटी भी कर रही थी तो बात को बदलते हुए एस एन सी यू में पदस्थ होने की बात करने लगे और कहे कि वहां पूरी सुरक्षा व्यवस्था है, वहीं जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली के मामले पर बात किया गया कि वहां से एक कोरेन्टीन व्यक्ति अपना वीडियो वायरल कर दवाई और व्यवस्थाओं की गुहार लगा रहा है तो उसके बारे में भी पल्ला झाड़ते हुए कहे कि पाली बी एम ओ को समझाइस दे दिया गया है सभी व्यवस्थायें दुरुस्त हैं, वहीं बताये कि पाली बीएमओ डॉक्टर व्ही के जैन को उमरिया कलेक्टर ने भी समझाइश दी है कि कोरोना से संबंधित मरीजों की देखरेख अच्छी तरीके से की जाए, और कहे कि कोविड में कोई दवाई तो है ही नही, साथ ही जब पूंछा गया कि एक व्यक्ति के खाने पर कितना व्यय किया जाता है तो बताये कि एक व्यक्ति के खाने पर प्रतिदिन तीन सौ रुपये नई गाइड लाइन के आधार पर व्यय किया जा रहा है। वहीं जब जिला अस्पताल में हो रही लापरवाही के बारे में बात किया गया तो उसमें भी पल्ला झाड़ते हुए कहे कि कोई लापरवाही नही बरती जा रही है।

डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव सी एम एच ओ


गौरतलब है कि 8 अगस्त से लगातार डियूटी कर रही एक नर्स को शक हुआ कि हमको हल्की सर्दी है तो कोरोना टेस्ट करवा लें तब उसका टेस्ट नही किया गया वहीं 15 अगस्त को पानी मे भीगने के कारण जब उस नर्स की तबियत कुछ नासाज हो गई तो फिर कोरोना टेस्ट करवाने गई तब उसको कह दिया गया कि बाद में कर देंगे लेकिन दुबारा 20 अगस्त को कोरोना टेस्ट करवाने के बाद भी लगातार डिलिवरी वार्ड में रात डियुटी करती रही और 2 दिन पूर्व कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने पर अस्पताल में कोरेन्टीन कर दिया गया। इतना ही नही डिलीवरी वार्ड की और भी नर्स कोरोना पॉजिटिव निकली है जिसको अस्पताल प्रबंधन छिपाता नजर आ रहा है।इस बीच कितनी माताओं और नवजात के सम्पर्क में आईं इसकी जानकारी किसी को नही है, वहीं उस वार्ड के नर्सों के सम्पर्क में कितनी माताएं और नवजात आये हैं इसको देखने के लिए जिला अस्पताल के जिम्मेदार तैयार नही हैं, खास बात तो यह है कि आजकल जिला अस्पताल के एस एन सी यू में पदस्थ नर्सों को ही डिलीवरी वार्ड से बच्चों को एस एन सी यू में ले जाने की डियुटी है, यदि सी एम एच ओ की बात मान भी लें तो बच्चों को एस एन सी यू तक तो वही नर्सें ले गईं हैं जो वहां डियुटी में हैं, इतना ही नही जानकारी के अनुसार 17 अगस्त को किसी सिस्टर के बेटे का जन्म दिन था जो कृष्णा पैलेस और कृष्णा रेस्टोरेंट में मनाया गया वहां सभी लोग एकत्रित हुए थे ऐसे में तो सभी संक्रमित हो सकते हैं, वहीं अगर देखा जाय तो एस एन सी यू में पदस्त स्टाफ द्वारा नवजात के मुंह मे पाइप डाल कर अपने मुंह से सक्शन किया जाता है जिसमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नही कोविड की गाइड लाइन के अनुसार कागजों में तो सब कुछ होता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई पालन नही होता है, कन्टेनमेट एरिया के लोग खुले आम घूमते नजर आते हैं, साथ ही कोरोना की सैम्पलिंग कराने वाले या जिसकी सैम्पलिंग की जाती है उसको रिपोर्ट आने तक कोरेन्टीन भी नही किया जाता है ऐसे में कहीं उमरिया जिला भी इंदौर न बन जाय, जानकारी के अनुसार रात में एस एन सी यू में मात्र एक लड़का ही सम्हाल रहा था, ऐसे में यदि कोई नवजात की हालत बिगड़ जाती तो अकेले क्या करता, इस तरफ भी अस्पताल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है। वहीं 18 अगस्त को डिलीवरी होने के बाद 20 अगस्त को चंदिया निवासी एक दंपति के नवजात की मौत भी हो चुकी है, जिसका स्पस्ट कारण बताने को कोई तैयार नहीं है।

मृत नवजात को ली मा

गौरतलब है कि सी एम एच ओ के अनुसार जब कोरोना की कोई दवा ही नही है तो लोगों को क्यों अस्पताल और कोरेन्टीन सेंटरों में रखा जाता है, कहीं इसमें बजट का खेल तो नही है। ऐसे में जिला अस्पताल और जिम्मेदारों की उच्च स्तरीय जांच होना आवश्यक है ताकि अप्रिय घटना को घटने से रोका जाए और लापरवाही बरतने वाले पर सख्त कार्यवाई की जाय।

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