गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री, दद्दा जी पंचतत्व में हुए विलीन

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देश के जाने माने गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री जिन्हें लोग दद्दा जी के नाम से जानते हैं, आज पंचतत्व में विलीन हो गए, उनका अंतिम संस्कार कटनी में झिंझरी स्थित दद्दा धाम में हुआ । उनके बेटे अनिल त्रिपाठी  ने अपने पिता को मुखाग्नि दी । इसके पूर्व उन्हें गॉर्ड ऑफ ऑनर दी गई।

सुरेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट

इस मौके पर हजारों की संख्या में दद्दा जी के शिष्य अपने गुरु को अंतिम विदाई देने पहुंचे। शनिवार की रात दद्दा जी को नाजुक हालत में दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल से वेंटिलेर के सहारे कटनी लाया गया था । तब से ही देशभर से उनके शिष्यों का आना बना हुआ था।

दद्दा जी की अंतिम यात्रा

दद्दा जी के निधन की खबर मिलते ही अभिनेता आशुतोष राणा, राजपाल यादव एवं पदम सिंह ठाकुर,  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, अजय विश्वनोई, अर्चना चिटनीस , रमेश मेंदोला, लखन घनघोरिया, गोपाल सिंह चौहान डग्गी राजा, इसके अलावा दद्दा जी के परम शिष्य वर्तमान विधायक और पूर्व राज्य मंत्री संजय पाठक कटनी पहुंच कर दद्दा जी के अंतिम दर्शन किये। इस दौरान लाउडस्पीकरों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की हिदायत दी जाती रही।

अस्पताल में दद्दाजी

दद्दा जी एक गृहस्थ संत के रूप में जाने जाते रहे है। उनके तीन बेटे और दो पुत्रिया हैं। दद्दा जी के पूरे देश में लाखो की संख्या में अनुयायी हैं। देश के अनेक शहरों में दद्दा जी ने सवा करोड़ शिवलिंग निर्माण यज्ञ के साथ ही मानस महायज्ञ का आयोजन किया है। अब तक वे 79 सवा करोड़ शिवलिंग निर्माण यज्ञ का आयोजन कर चुके हैं।

दद्दाजी को राजकीय सम्मान

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