जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या हुई 5, लगातार हो रही हैं मौतें

हेल्थ

सुरेन्द्र त्रिपाठी

उमरिया 14 सितम्बर – जिले मे कोरोना से हुई पांचवीं मौत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। नौरोजाबाद तहसील क्षेत्र के ग्राम बधवार निवासी महिला मेडिकल कॉलेज शहडोल मे भर्ती थी, जो एक दिन रूकने के बाद बिना किसी की अनुमति के भाग खड़ी हुई और चौथे दिन घर मे उसकी मौत हो गई। ताज्जुब तो इस बात का है कि मरीज के कोविड केयर सेंटर छोडऩे की घटना से न तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन वाकिफ है और न ही जिले का स्वास्थ्य विभाग। संक्रमित महिला ने इस दौरान कितने रिश्तेदारों को लोगों को बीमारी बांट दी होगी यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा परंतु इस घटना ने जिम्मेदारों की कलई खोल कर रख दी है।
बताया जाता है कि 52 वर्षीय ग्राम बघवार निवासी संक्रमित महिला का नागपुर मे इलाज चल रहा था। वापस लौटने पर जिला चिकित्सालय उमरिया मे उसका सेम्पल लेकर कोरोना की जांच कराई गई। पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर 9 सितंबर को उसे मेडिकल कालेज शहडोल रेफर किया गया था। जानकारी के मुताबिक 11 सितंबर को उक्त महिला बिना किसी की अनुमति लिये और सूचना दिये अपने घर आ गई। जहां 14 सितंबर की सुबह 3 बजे उसकी मौत भी हो गई। वहीं जानकारी के अनुसार मृत महिला का दामाद भी कोरोना पॉजिटिव हो गया है।
जिस महामारी ने पूरे देश को हिला कर रख दिया हो, उसे लेकर बरती गई संवेदनहीनता ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को कटघरे खड़ा कर दिया है बल्कि संभाग मे तेजी से पैर पसार रहे कोरोना संक्रमण के असली कारण को भी काफी हद तक उजागर किया है। तो क्या यह समझा जाय कि विभाग की लापरवाही के कारण ही बीमारी निरंकुश हुई है। क्योंकि यदि इसी तरह संक्रमितों को अस्पतालों से जाने की छूट है, तो इससे पहले भी कई मरीजों ने न जाने कितनो को बीमारी से ग्रस्त किया होगा। जानकारों का मानना है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, अत: इसकी गहराई से जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही जरूरी है। वहीं अगर देखा जाय तो कहीं आक्सीजन की कमी कहीं ठीक ढंग से खाना न मिलना भी लोगों को भागने पर मजबूर करता है। एक तरफ तो प्रदेश के मुखिया बड़ी बड़ी बात करते हैं कि हम हैं न, चिंता की कोई बात नही है, सारी व्यवस्था हम दे रहे हैं दूसरी तरफ उनके निरंकुश नुमाइंदे सारी घोषणाओं पर पलीता लगा रहे हैं।
इस मामले में जिले के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना से मृत महिला को छोड़े जाने के संबंध मे मेडिकल कॉलेज शहडोल के डीन से जानकारी लेकर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
वहीं मेडिकल कालेज शहडोल के डीन डॉक्टर मिलिन्द शेलवलकर का कहना है कि संक्रमित महिला के मेडिकल कॉलेज से बिना बताये चले जाने की जानकारी मुझे नहीं है। अच्छा हुआ आपने बता दिया, मै पता करवाता हूं।
जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि बीते दो दिनो मे जिन दो कोरोना पीडि़तों की मौत हुई है, उन्हे पूर्व से ही गंभीर बीमारियां थी। कोविड-19 के जिला समन्वयक डा. संदीप सिंह एवं प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि बीमारी से मृत महिला को कैंसर था, जिसका नागपुर मे इलाज चल रहा था, वहीं दूसरा व्यक्ति शराब के अत्याधिक सेवन के कारण कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर महिला को शहडोल रेफर किया गया जबकि युवक का स्थानीय कोविड केयर सेंटर मे उपचार किया जा रहा था। इन्हे मिला कर कोरोना से मरने वालों की संख्या 5 हो गई है। कुल केस 226 हैं, वहीं ठीक होने वालों की संख्या 147 है। अभी तक 693 रिपोर्ट अप्राप्त हैं, वहीं एक्टिव केश 76 हैं, इस तरह लगातार लापरवाहियों के चलते जिले में मौत और कोरोना पॉजिटिव दोनो की संख्या में इजाफा होता जा रहा है और अस्पताल प्रबंधन अपनी मनमानी से बाज नही आ रहा है।

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