आबकारी और शराब ठेकेदार की मिली भगत से बिकी जहरीली शराब, बड़ी घटना होने से बची

क्राइम

सुरेन्द्र त्रिपाठी

उमरिया 5 जुलाई – जिले में एक बड़ी घटना घटित होने से बच गई हुआ ये कि देशी शराब दुकान में अनुपयोगी शराब बेच गई जैसे ही युवको ने शराब का सेवन किया तो बेचैनी महसूस करते हुए जिला अस्पताल पहुंच गए जहां पर उनका इलाज किया गया मामले की गंभीरता को देखते हुए वहां पर जल्द ही एसडीएम, तहसीलदार पहुंच गए और कुछ शराब की जप्ती भी की गई और शराब दुकान को दिखावटी रूप से सील कर दिया गया और बाद में फिर से खोल दिया गया। वहीं जिले की अन्य दुकानों में अधिक रेट पर भी बेची जा रही है शराब, जिम्मेदार मौन।
उमरिया नगर के बीचो-बीच फजिलगंज और चौपाटी के सामने रहवासी इलाके में देशी शराब की दुकान है जहां पर अनुपयोगी शराब को बेच दिया गया और युवकों को शराब के सेवन करते ही तबीयत बिगड़ गई जिन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया प्रशासन भी चेत गया और शराब भट्टी को सील किया गया लेकिन ठेकेदार के दबाव के चलते पुनः दुकान खोल दी गई। वहीं जिले के मानपुर अंग्रेजी शराब दुकान में तो आबकारी निरीक्षक के सामने खुले आम अधिक रेट पर शराब बेची जा रही है और निरीक्षक ठेकेदार के पक्ष में ही बात कर रहे हैं। उसकी भी झलक देखने को मिल रहा है।
इस मामले में जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष और समाजसेवी पुष्पराज सिंह बताये कि यह 2015 में अवैध शराब पकड़ी गई थी और आबकारी विभाग के डी सी उमरिया वेयर हाउस में रखवा दिए थे और कहे कि यह मानव हित के लिए अनुपयोगी है, इसको नष्ट करवा देना लेकिन कल वही शराब उमरिया की दुकान में बिक रही थी, इस मामले में वेयर हाउस में बैठे लोग और आबकारी विभाग के अधिकारी जो इसमें लिप्त हैं सभी दोषी हैं और जब यह मामला जिले के कलेक्टर साहब के पास गया तो वो तत्काल तहसीलदार साहब और आबकारी विभाग के लोगों को भेजे जप्त करवाये है, हम यह चाहते हैं कि जो जनअनुपयोगी शराब है अगर और ज्यादा लोग पीते और किसी की मृत्यु होती तो उमरिया जिला कलंकित होता इसलिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से हमारी मांग है कि दोषियों के ऊपर सख्त कार्यवाई की जाय।
इस मामले में जांच करने आये तहसीलदार बांधवगढ़ दिलीप सिंह से जब बात किया गया तो बताये कि कलेक्टर साहब को सूचना मिली कि अरुण प्रताप सिंह ठेकेदार द्वारा एक्सपायरी डेट की शराब बेची जा रही है तो उनके निर्देश पर राजस्व और आबकारी का अमला यहां आया और जांच किये तो अधिकांश पाव में डेट डली है और नही डली है। वहीं आबकारी विभाग से आये अधिकारी मामले को दबाते हुए बताये कि कोई भी एक्सपायरी डेट की नही पाई गई हां कुछ बिना डेट की जरूर पाई गई है।
इस पूरे मामले में अगर किसी की गलती है तो वेयरहाउस के इंचार्ज व ठेकेदार की है ना तो वह पुरानी शराब देता और ना ठेकेदार खरीदता लेकिन पुराने एवम मानव के लिए अनुपयोगी स्टाक को खत्म न कर के लिए लोगों के जीवन के साथ खेला जाता है अगर सही जांच हो तो ठेकेदार औऱ आबकारी विभाग के वेयर हाउस प्रभारी के ऊपर जान से मारने का अपराधिक मामला बनना चाहिए मगर ठेकेदार के रसूख के चलते जिला प्रशासन भी घुटने टेकने को मजबूर है, ऐसे में कभी भी कई परिवार तबाही की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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