करोड़ो की बाउंड्रीवाल पर रेत का नामो-निशान नही, विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत

क्राइम

सुरेन्द्र त्रिपाठी

उमरिया 30 सितम्बर – आज हम आपको 21 वी सदी के डिजिटल भारत के युग मे उमरिया जिले का एक अजीबो गरीब मामला दिखाते हैं एक ओर जँहा आज के समय मे नई नई तकनीकों से देखते ही देखते गगनचुंबी इमारते खड़ी हो जाती हैं वहीं दूसरी ओर उमरिया में एक करोड़ 4 लाख की लागत से नवनिर्मित हॉकी खेल मैदान में बाउंड्रीवाल का निर्माण क्रेसर डस्ट अर्थात पत्थर का चूरा के साथ किया जा रहा है मजे की बात तो यह है कि इस पुरे भ्रष्टाचार की तस्वीरें जब मीडिया के कैमरे में कैद हो गई तो इंजीनियर ने हैरान करने वाला तर्क देते हुए कह दिया कि रेत नही मिल रही तो डस्ट से भी काम किया जा सकता है जिसकी अनुमति हमारे वरिष्ठ अधिकारियों ने दी है। 


अब आप सोच रहे होंगे आज के जमाने मे इंजीनियर साहब की यह कौन सी इंजीनियरिंग है जिसमे रेत की जगह क्रेसर डस्ट अर्थात पत्थर का चूरा का इस्तेमाल किया जा सकता है और इस क्रेसर डस्ट से निर्माण की जा रही पिलर और बाउंड्रीवाल के साथ उसकी नीवं कितनी मजबूत होगी और कब तक टिक पाएगी यह तो आप समझ ही गए होंगे कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि शासन द्वारा हॉकी खेल मैदान को बनाने जो करोड़ो रूपये युवक एवम कल्याण विभाग द्वारा दिए गये है। उसका इसमें कितना भ्रष्टाचार है पता लगाना मुश्किल ही नही नामुमकिन है ।

ए के कोरी

इस मामले में जब ई ई पी आई यू ए के कोरी से बात किया गया तो वो रेत न मिलने की दलील देते हुए कहे कि अभी रेत उपलब्ध न होने के कारण क्रेसर डस्ट से नींव का काम किया जा रहा है इसको मिलाने की अनुमति है, जब रेत मिलने लगेगी तो रेत का उपयोग किया जाएगा। गौरतलब है कि रेत की बाइंडिंग कैपिसिटी और क्रेसर डस्ट की बाइंडिंग कैपिसिटी अलग अलग होती है, रेत की वाईट्स कम होती है और डस्ट की वाईट्स अधिक होती है, रेत की खासियत है कि जब गिट्टी और सीमेंट के साथ मिलाई जाती है तो पिलर के सारे एयर स्पेस भर जाते हैं और क्रेसर डस्ट में ऐसा नही होता क्योंकि उसमें गिट्टी के चूरे के साथ मिट्टी का अंश होता है, लेकिन यहां के इंजीनियर और ई ई दोनो मिल कर ठेकेदार को फायदा पंहुचाने का काम कर रहे हैं। वहीं ऐसा भी नही है कि रेत नही मिल रही है, रेत भी पर्याप्त मात्रा में मिल रही है जिले के कलेक्टर कई भण्डारणो को अनुमति भी प्रदान किये हैं और उन भण्डारणो से बराबर रेत की सप्लाई भी हो रही है, जिले में चारो तरफ रेत गिरी हुई नजर आ रही है लेकिन पी आई यू के अधिकारियों और ठेकेदार को रेत नही मिल रही है, इससे तो साफ नजर आ रहा है कि दोनो मिल कर युवक एवम कल्याण विभाग के पैसों की बंदरबांट करने में लगे हैं।


गौरतलब है कि बच्चों और जिले के खिलाड़ियों के लिए बनाए जा रहे इस मिनी स्टेडियम में नींव ही भ्रस्टाचार की भरी जा रही है तो आगे क्या होगा इसका कोई पता नही है वहीं इस मैदान में खेलने वाले बच्चों के लिए भी खतरा बना रहेगा।

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