कारगिल युद्ध : गन की गोलियां खत्म होने के बाद लात-घूंसों से ही मार गिराया 4 पाकिस्तानियों को

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आज कारगिल विजय की 20वीं वर्षगांठ है। 8 मई से 26 जुलाई तक चला कारगिल युद्ध में शहीद हुये भारतीयों जबाबों की शोर्य गाथा को हम कभी नही भूल पायेगें। क्योकि इन्होनें इतिहास के पन्नों में भी अपने वीरता की कहानी को खून से लिख दिया है। हम आज उन शहीदों को नमन करते है। इन्ही जबाजों में से एक वीर सिपाही की भारतीय शौर्य गाथा को भी जरूर याद किया जाएगा।

पंजाब का एक ऐसा वीर सिपाही जिसने इस दिन अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मां भारती को गौरवान्वित किया था। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले का जवाब वो अपनी हर गोलियों से बराबर दे रहे थे कि तभी सिपाही सतपाल सिंह की एलएमजी की गोलियां खत्म हो गईं थीं। तब उन्होनें बंदूक को एक तरफ करके सीधे पाकिस्तानियों से भिड़ गए और लात-घूंसे से मारते हुये 4 हमलावरों को वही ढेर कर दिया। उनके इस पराक्रम के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।

जानें टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने की तैयारी कर रही टुकड़ी के बारें में..

सतपाल सिंह के मुताबिक युद्ध के दौरान जब 19 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने की तैयारी कर रही थी तो 8 सिख रेजिमेंट की एक टुकड़ी को मदद के  लिए भेजा गया। इन्हीं खास टुकड़ी का हिस्सा सतपाल सिंह भी थे। 2 अफसर, 4 जेसीओ और 46 दूसरे रैंक के जवानों की टुकड़ी ने 5 जुलाई की शाम को टयागर हिल की ओर रवाना हुई। 7 जुलाई को भारतीय टुकड़ी को पीछे हटाने के लिए पाकिस्तान की तरफ से काउंटर अटैक किया गया।

एक के बाद एक पाकिस्तान के लोगों को हराकर हमारा निशाना अगला होता था। कई अफसरों और जेसीओ के घायल होने के बाद सूबेदार निर्मल सिंह ने कमांड अपने हाथ में ले ली। जिनके सिर पर पहले से ही गोली थी। लेकिन इसके बावजूद उन्होनें ‘बोले सो निहाल-सत श्री अकाल’ का नारा बोलते टुकड़ियों के साथ आगे की तरफ बढ़ते गए।

सतपाल की एलएमजी (लाइट मशीन गन) में सिर्फ चार गोलियां बची थी, जबकि पाकिस्तान की तरफ लंबी-चौड़ी कद-काठी वाला एक अफसर फायरिंग के साथ कवरिंग मैथड के साथ ताबड़तोड़ हमले कर रहा था। बात दोनों तरफ से एक-दूसरे को गाली-गलौच और फिर हाथापाई तक आ गई। सतपाल बिना हथियार के ही पाकिस्तानी खेमे को लीड कर रहे शेर खान समेत चार को पीट-पीटकर मार डाला। इसकी खबर फैलते ही पाकिस्तानी खेमे के हौसले पस्त हो गए थे।

ब्रिगेडियर ने की थी वीर चक्र की सिफारिश

सतपाल सिंह को वीर चक्र से नवाजा गया था। उन्हें यह सम्मान तत्कालीन ब्रिगेडियर एमपीएस बाजवा की सिफारिश पर मिला। पूर्व बिगेडियर बाजवा कहते हैं, ‘टाइगर हिल पर सतपाल के अदम्य साहस को और शौर्य को देखते हुए मैंने उसका नाम वीर चक्र के लिए मार्क किया था।’

खास दिन पर मिला खास सम्मान

सतपाल सिंह संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं। यहां कारगिल विजय दिवस के मौके पर उन्हें सम्मान मिला है। चंडीगढ़ में वार मेमोरियल पर शहीदों को नमन करने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सतपाल को हेड प्रोमोट करके एएसआई बनाने का ऐलान किया है। हालांकि यह खुशखबरी सतपाल सिंह को पटियाला इंटरनेट कॉलंग के जरिये मिली।

सतपाल सिंह पंजाब पुलिस की ट्रैफिक विंग में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर

इन दिनों संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में चौराहे पर लोगों को ट्रैफिक रूल्स फॉलो करवाने का जिम्मा संभाले हुए सतपाल सिंह कोई मामूली पुलिस वाला नहीं है। सीने पर चार मेडल हैं। ऊपर की पट्‌टी का रंग आधा नीला तो आधा नारंगी है, यानि वीर चक्र।

2009 में सर्विस पूरी करने के बाद सेना से सिपाही के पद से रिटायर हुए सतपाल सिंह 2010 में एक्स सर्विस कोटे से पंजाब पुलिस में भर्ती हो गए। इन दिनों वह पंजाब पुलिस की ट्रैफिक विंग में हेड कॉन्स्टेबल हैं।

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